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कटनी जंक्शन: ‘बदमाशों का गढ़’ बने आउटर, सुरक्षा के दावे बेअसर

On: December 1, 2025 10:38 AM
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कटनी जंक्शन
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कटनी. कटनी जंक्शन के आउटर इलाके इन दिनों बेखौफ बदमाशों का गढ़ बन चुके हैं, जहां आए दिन आपराधिक वारदातों को अंजाम दिया जा रहा है। हालात ये हैं कि रेलवे सुरक्षा बल (RPF) और राजकीय रेलवे पुलिस (GRP) की तमाम निगरानी और सुरक्षा के दावे यहां बेअसर साबित हो रहे हैं। अपराधी न सिर्फ ट्रेन के बाहर से यात्रियों के सामान लूट रहे हैं, बल्कि अब तो वे चेनपुलिंग कर ट्रेनों को आउटर पर रोककर लूटपाट कर रहे हैं।
​चेनपुलिंग की बढ़ती घटनाएं: बदमाशों का नया तरीका

​हाल ही में 22 नवंबर को सीआरपीएफ जवानों से भरी एक ट्रेन में बंदूक की मैगजीन चोरी की सनसनीखेज वारदात हुई थी। इस घटना से ठीक एक दिन पहले, 20 नवंबर की रात को कटनी स्टेशन के आउटर पर आधी रात में तीन ट्रेनों में चेनपुलिंग की गई थी। जानकारी के अनुसार, खिरहनी फाटक के पूर्व गाड़ी संख्या 11072 कामायनी एक्सप्रेस और 12539 लखनऊ सुपर फास्ट में, जबकि गायत्रीनगर आउटर में गाड़ी संख्या 12792 दानापुर-सिकंदराबाद सुपरफास्ट में चेन खींचकर ट्रेनों को रोका गया।
​हालांकि, जीआरपी कटनी में इस दौरान हुई किसी भी वारदात को दर्ज नहीं किया गया है, लेकिन इन घटनाओं ने स्पष्ट कर दिया है कि आउटर पर ट्रेनों को रोकना बदमाशों का एक नया और खतरनाक तरीका बन गया है।
​दर्ज नहीं हो पातीं सैकड़ों वारदातें
​सूत्रों के मुताबिक, कटनी जंक्शन के आउटर पर चलती ट्रेन में होने वाली छिनतई की सैकड़ों वारदातें पुलिस तक पहुंच ही नहीं पाती हैं। लूटे-पिटे यात्री अक्सर अपने सफर को बीच में न छोड़ने की वजह से शिकायत दर्ज कराए बिना आगे बढ़ जाते हैं।
​सीआरपीएफ जवान की मैगजीन चोरी करने वाले आरोपी से पूछताछ के बाद उसके बताए स्थान से कई पर्स, एटीएम और अन्य सामान बरामद हुए थे। इससे यह साबित होता है कि अपराधी वारदात को अंजाम देने के बाद यात्रियों के सामान को आउटर पर फेंक देते थे, जिससे यह क्षेत्र अपराधियों के लिए एक सुरक्षित ठिकाना बन गया है।

​सुरक्षा व्यवस्था की नाकामी का एक और उदाहरण बीते माह सतना की ओर जा रही सूबेदारगंज स्पेशल ट्रेन में हुई पत्थरबाजी की घटना है। बदमाशों ने पत्थर मारकर ट्रेन की खिड़की तोड़ दी, जिससे वह सीधे यहां बैठे एक मासूम बच्चे के सिर पर लगा और वह लहूलुहान हो गया।
​परिजन को मैहर स्टेशन पहुंचकर बच्चे का उपचार कराना पड़ा।
​ इस मामले में जीआरपी ने एफआईआर (FIR) दर्ज नहीं की, जबकि आरपीएफ ने अज्ञात आरोपी के खिलाफ रेल एक्ट के तहत मामला दर्ज किया।

​जीआरपी और आरपीएफ द्वारा अपराधों पर लगाम लगाने के लिए लगाए गए सीसीटीवी कैमरे भी अब निष्प्रभावी साबित हो रहे हैं।
​ कटनी आउटर पर लगाए गए कुल 19 कैमरों में से कुछ स्थानों पर कैमरे खराब हो गए हैं, जबकि कुछ को असामाजिक तत्वों ने तोड़ दिया है। इन कैमरों का मुख्य उद्देश्य चोरी और झपटमारी को रोकना था, लेकिन इनकी विफलता से अपराधियों के हौसले बुलंद हैं।
16 कैमरों में से 8 साउथ दिशा में और 8 सतना एंड की तरफ लगाए गए थे।
इस संबंध मे ने बताया कि एलपी कश्यप, टीआई जीआरपी ​जीआरपी द्वारा सुरक्षा को लेकर पहल करते हुए सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। आउटर पर लगे कुछ कैमरे बंद हैं, जिनका सुधारकार्य जल्द कराया जाएगा। असामाजिक तत्वों के दिखते ही गश्त टीम को मौके पर भेजा जाता है।

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