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वेतन न मिलने से आहत डॉक्टर का इस्तीफा, बड़वारा क्षेत्र की स्वास्थ्य सेवाएं वेंटिलेटर पर

On: March 8, 2026 4:15 PM
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कटनी। जिले के ग्रामीण इलाकों में बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्थाओं के बीच एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। बड़वारा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में पदस्थ मेडिकल ऑफिसर डॉ. नीरज विश्वकर्मा ने पिछले 8 महीनों से वेतन न मिलने के कारण अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। एक ओर सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर इलाज के दावे करती है, वहीं दूसरी ओर बंध पत्र चिकित्सकों को महीनों तक मानदेय के लिए तरसाना प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
8 महीने से काट रहे थे दफ्तरों के चक्कर
डॉ. नीरज विश्वकर्मा के अनुसार, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) कार्यालय स्तर पर उनकी सैलरी को लेकर लगातार आनाकानी की जा रही थी। उन्होंने बताया, मैं लंबे समय से बड़वारा CHC में सेवा दे रहा हूं, लेकिन 8 माह से वेतन नहीं मिला। फोन कॉल से लेकर मुख्यालय में व्यक्तिगत उपस्थिति तक, हर संभव प्रयास किया लेकिन आश्वासन के अलावा कुछ हासिल नहीं हुआ। अंततः थक-हारकर शनिवार को मैंने अपना त्यागपत्र सौंप दिया।
लाखों की आबादी, अब मात्र एक डॉक्टर के भरोसे
बड़वारा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर क्षेत्र की लगभग 1 लाख की आबादी निर्भर है। नियमों के मुताबिक यहाँ 4 एमबीबीएस और 3 विशेषज्ञ डॉक्टरों के पद स्वीकृत हैं, जो वर्षों से खाली पड़े हैं। वर्तमान में यहाँ केवल दो बंध पत्र चिकित्सक कार्यरत थे, जिनमें से डॉ. विश्वकर्मा के जाने के बाद अब मात्र एक डॉक्टर के कंधों पर पूरे अस्पताल का बोझ आ गया है। स्थानीय नागरिकों में इस बात को लेकर भारी रोष है कि यदि एकमात्र डॉक्टर भी अनुपस्थित रहे, तो मरीजों को इलाज के लिए दर-दर भटकना पड़ेगा।
आंदोलनों के बाद भी नहीं सुधरे हालात
गौरतलब है कि महज एक माह पूर्व ही ब्लॉक कांग्रेस कमेटी ने अस्पताल की चरमराई व्यवस्थाओं और डॉक्टरों की कमी को लेकर तीन दिवसीय भूख हड़ताल और सत्याग्रह किया था। उस समय प्रशासन ने व्यवस्थाएं दुरुस्त करने का भरोसा दिया था, लेकिन सुधार के बजाय स्थिति और भी बदतर हो गई है। ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर (प्रभारी) डॉ. राममणि पटेल ने भी स्वीकार किया कि जिला स्तर से वेतन रोके जाने के कारण डॉक्टरों में भारी असंतोष व्याप्त है।
जिम्मेदारों की चुप्पी
इस संवेदनशील मामले पर जब मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. राज सिंह से उनका पक्ष जानने के लिए संपर्क करने की कोशिश की गई, तो उन्होंने फोन उठाना उचित नहीं समझा। अधिकारियों की यह चुप्पी स्वास्थ्य विभाग की संवेदनहीनता को उजागर करती है।

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