कटनी। मध्य प्रदेश सरकार की जनकल्याणकारी संबल योजना गरीबों को सहारा देने के लिए बनाई गई है, लेकिन कटनी जिले की ढीमरखेड़ा तहसील में यह योजना एक बेबस विधवा के लिए अंतहीन इंतजार का सबब बन गई है। ग्राम पिंडरई निवासी हरिजन महिला सुषमा बाई चौधरी पिछले चार वर्षों से अपने हक की राशि पाने के लिए जनपद पंचायत कार्यालय की धूल फांक रही हैं। विडंबना यह है कि 50 से अधिक बार कार्यालय के चक्कर काटने के बाद भी उन्हें केवल आश्वासन की घुट्टी पिलाई जा रही है।
जंगल में मिली थी पति की लाश, तब से शुरू हुआ संघर्ष
पीड़ित महिला सुषमा बाई आज फिर जनपद पंचायत कार्यालय पहुँच कर एक लिखित शिकायत देते हुए बताया कि ने बताया कि उनके पति महेंद्र चौधरी की लाश चार साल पहले जंगल में संदिग्ध परिस्थितियों में मिली थी। पति का संबल योजना में विधिवत पंजीयन था, जिसके आधार पर मृत्यु सहायता राशि मिलनी चाहिए थी। सुषमा ने सभी आवश्यक दस्तावेज जमा कर दिए, लेकिन कार्यालय की फाइलें आगे बढ़ने का नाम नहीं ले रही हैं।
अमीरों के काम पहले, गरीबों की कोई सुनवाई नही
जनपद कार्यालय में अधिकारियों की बेरुखी से त्रस्त महिला का दर्द छलक पड़ा। उन्होंने आरोप लगाया कि
साहब, यहाँ अमीरों के काम पहले हो जाते हैं, लेकिन हम जैसे गरीबों को सिर्फ परेशान किया जाता है। मेरे छोटे-छोटे बच्चे हैं, पति के जाने के बाद उनका पेट पालना मुश्किल हो रहा है। हर बार अधिकारी कहते हैं ‘हो जाएगा’, लेकिन चार साल बीत गए, कुछ नहीं हुआ।
इस मामले में जब जनपद सीईओ यजुवेंद्र कोरी से बात की गई, तो उन्होंने मामले को संज्ञान में होने की बात कही। उन्होंने बताया कि महिला के पति की मौत की स्थिति स्पष्ट नहीं हो पा रही है। पीएम रिपोर्ट और पुलिस एफआईआर में मौत का सटीक कारण स्पष्ट न होने की वजह से मामला अटका हुआ है। हालांकि, उन्होंने दावा किया कि योजना प्रभारी को निर्देशित किया गया है और जल्द ही निराकरण का प्रयास किया जाएगा।





