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स्लीमनाबाद में रेल रोको आंदोलन: ट्रेनों के ठहराव की मांग को लेकर भारी प्रदर्शन, आश्वासन के बाद माने ग्रामीण

On: March 10, 2026 4:02 PM
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कटनी। जिले के स्लीमनाबाद रेलवे स्टेशन पर मंगलवार को उस समय तनावपूर्ण स्थिति बन गई जब क्षेत्र के दर्जनों गांवों के सैकड़ों ग्रामीणों ने ट्रेनों के ठहराव की मांग को लेकर ‘रेल रोको’ आंदोलन का बिगुल फूंक दिया। जबलपुर-अंबिकापुर सिंगरौली इंटरसिटी और जबलपुर-चित्रकूट एक्सप्रेस जैसी महत्वपूर्ण ट्रेनों के स्टेशन पर न रुकने से आक्रोशित ग्रामीणों ने स्टेशन परिसर में जमकर नारेबाजी की। प्रशासन की मुस्तैदी के चलते आंदोलनकारियों को बैरिकेड्स पर ही रोक दिया गया, जिससे रेल यातायात बाधित होने से बच गया।
प्रमुख ट्रेनों के स्टॉपेज की मांग पर अड़े ग्रामीण
ग्रामीणों का कहना है कि स्लीमनाबाद एक महत्वपूर्ण व्यापारिक और आवागमन का केंद्र है, लेकिन प्रमुख ट्रेनों का स्टॉपेज न होने से छात्रों, मरीजों और व्यापारियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। विशेष रूप से जबलपुर-अंबिकापुर सिंगरौली इंटरसिटी और जबलपुर-चित्रकूट एक्सप्रेस के ठहराव न होने से क्षेत्र के विकास पर असर पड़ रहा है। आक्रोशित ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि लंबे समय से मांग करने के बावजूद रेलवे प्रशासन उनकी अनदेखी कर रहा है।
भारी पुलिस बल रहा तैनात, छावनी बना स्टेशन
आंदोलन की पूर्व सूचना के कारण रेलवे प्रशासन और जिला पुलिस पहले से ही सतर्क थी। स्टेशन परिसर को छावनी में तब्दील कर दिया गया था। आरपीएफ (RPF) और जीआरपी (GRP) के साथ स्थानीय पुलिस का भारी बल तैनात किया गया था। पुलिस ने ग्रामीणों को स्टेशन की पटरियों तक पहुंचने से पहले ही मजबूत बैरिकेडिंग लगाकर बाहर रोक दिया। इस दौरान ग्रामीणों और पुलिस के बीच हल्की नोकझोंक भी देखने को मिली।
अधिकारियों का आश्वासन और आंदोलन की समाप्ति
मौके पर पहुंचे रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों और स्थानीय प्रशासनिक अमले ने ग्रामीणों के साथ लंबी चर्चा की। ग्रामीणों ने एक ज्ञापन सौंपते हुए अपनी मांगों को प्रमुखता से रखा। रेलवे अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि वे ग्रामीणों की इन मांगों को उच्च स्तर तक पहुंचाएंगे और जल्द ही ट्रेनों के ठहराव पर सकारात्मक निर्णय लिया जाएगा। अधिकारियों के ठोस आश्वासन के बाद ग्रामीणों ने फिलहाल अपना आंदोलन स्थगित कर दिया है।
भले ही प्रशासन ने फिलहाल स्थिति संभाल ली हो, लेकिन ग्रामीणों के तेवर अभी भी कड़े हैं। आंदोलन का नेतृत्व कर रहे प्रतिनिधियों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यह केवल एक संकेत था। यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर ट्रेनों का ठहराव शुरू नहीं किया गया, तो अगली बार बिना किसी सूचना के रेल पटरियों पर बड़ा आंदोलन किया जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी पूरी तरह से रेलवे प्रशासन की होगी।

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