कटनी। तहसील बहोरीबंद के अंतर्गत आने वाले समस्त ग्राम कोटवारों ने शुक्रवार को अपनी वाजिब मांगों और उपार्जन पंजीयन में आ रही तकनीकी व प्रशासनिक समस्याओं को लेकर जिला कलेक्टर के नाम एक ज्ञापन सौंपा। कोटवारों का कहना है कि शासन की सेवा भूमि पर फसल उगाने के बावजूद उन्हें पंजीयन के लिए हर सीजन में दर-दर भटकना पड़ता है।
हर सीजन में खड़ा होता है संकट
ज्ञापन देने पहुंचे कोटवारों ने प्रशासन को अवगत कराया कि चाहे खरीफ की फसल हो, रबी की या जायद की, उन्हें अपनी उपज बेचने के लिए पंजीयन कराने में भारी मशक्कत करनी पड़ती है। कोटवारों के अनुसार, पोर्टल पर समय रहते व्यवस्था नहीं की जाती, जिससे उनकी मेहनत की कमाई पर अनिश्चितता के बादल मंडराने लगते हैं।
कोटवारों ने उठाईं ये प्रमुख समस्याएँ
कोटवारों ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए ज्ञापन में तीन मुख्य बिंदुओं पर ध्यान आकर्षित किया है पंजीयन के लिए पोर्टल पर कोटवारों की श्रेणी को लेकर समय पर तकनीकी सुधार या विकल्प नहीं दिया जाता। प्रशासन द्वारा केवल अंतिम 1 या 2 दिनों के लिए पोर्टल खोला जाता है। इतने कम समय में सभी कोटवारों का पंजीयन होना लगभग असंभव होता है, जिससे उनमें मानसिक तनाव और उपज न बिक पाने का भय बना रहता है। जहां अन्य किसानों के लिए उनके स्थानीय उपार्जन केंद्रों पर पंजीयन की सुविधा उपलब्ध है, वहीं कोटवारों को पंजीयन के लिए जिला मुख्यालय बुलाया जाता है। खेती-किसानी के व्यस्त समय में मुख्यालय के चक्कर काटने से उनके कृषि कार्य और सरकारी ड्यूटी दोनों प्रभावित होते हैं कोटवारों ने मांग की है कि उन्हें भी सामान्य कृषकों की भांति स्थानीय केंद्रों पर ही पंजीयन की सुविधा प्रदान की जाए। साथ ही, पोर्टल को समय रहते अपडेट किया जाए ताकि बिना किसी बाधा के वे अपनी फसल का विक्रय कर सकें।





