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कटनी में पराली प्रबंधन का नवाचार: खेतों तक पहुंचे कलेक्टर, किसानों को किया प्रोत्साहित

On: November 13, 2025 3:42 PM
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कटनी। जिले में धान की पराली (नरवाई) प्रबंधन के क्षेत्र में किसानों द्वारा किए जा रहे नवाचारों को गति देने और सीधे उनसे संवाद स्थापित करने के लिए कलेक्टर आशीष तिवारी ने गुरुवार को खेतों की पगडंडियां नापी। पर्यावरण संरक्षण और मिट्टी की जैविक उर्वरा शक्ति को बढ़ाने के इस महत्वपूर्ण प्रयास में, किसान अपने खेतों के ‘सहयोगी जैविक मित्रों की क्षति को रोकने के लिए अभिनव पहल कर रहे हैं।
​कलेक्टर तिवारी ने विकासखंड रीठी के पोंडी, महगवा और बड़गांव हीरापुर के खेतों में पहुंचने के लिए स्वयं करीब एक-एक किलोमीटर तक पैदल चलकर किसानों से जीवंत संवाद किया। उन्होंने मौके पर उन्नत कृषि यंत्रों की मदद से किए जा रहे नरवाई प्रबंधन के नवाचारों का निरीक्षण किया।
​कलेक्टर ने किसानों से सशक्त अपील की कि वे नरवाई को बिल्कुल न जलाएं। नरवाई जलाने से पर्यावरण प्रदूषित होता है और खेत की मिट्टी को उपजाऊ बनाने वाले असंख्य सूक्ष्मजीव जलकर नष्ट हो जाते हैं। उन्होंने किसानों को नरवाई प्रबंधन यंत्र अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया।
​रीठी के ग्राम पौड़ी में, कलेक्टर तिवारी कृषक सुनील जैन के खेत पर पहुंचे। जहाँ उन्होंने नरवाई प्रबंधन के तहत सुपर सीडर से गेहूं की बोनी की प्रक्रिया का अवलोकन किया। उन्होंने ट्रेक्टर मालिक हल्के राम तिवारी से चर्चा की, जो किसानों को यह सेवा उपलब्ध करा रहे हैं। तिवारी ने बताया कि वे करीब 1500 रुपए प्रति घंटा के किराये पर सुपर सीडर किसानों को उपलब्ध कराते हैं।
​कलेक्टर ने किसान सुनील जैन के इस तरीके के सफल प्रयोग की सराहना की और उन्हें क्षेत्र के साथ-साथ आस-पास के अन्य किसानों को भी सुपर सीडर के माध्यम से नरवाई प्रबंधन के लिए प्रोत्साहित करने को कहा। सुपर सीडर मशीन खेत में खड़ी पराली को काट कर मिट्टी में मिला देती है और साथ ही बुवाई का कार्य भी करती है, जिससे किसानों का समय और खर्च दोनों बचता है।
​अपने संवाद दौरे के दौरान, कलेक्टर आशीष तिवारी ने ग्राम महगवा में कृषक संदीप जैन के खेत का भी दौरा किया। उन्होंने संदीप जैन द्वारा अपनाई जा रही चना और सरसों की अंतर्वर्ती खेती की पद्धति की जानकारी ली।
​इसके अलावा, कलेक्टर ने कृषक संदीप जैन द्वारा एक नवाचार के तहत की जा रही कुसुम की खेती की भी विस्तृत जानकारी प्राप्त की। कुसुम एक तिलहनी फसल है, जिसका तेल निकाला जाता है। इस तरह के नवाचार न केवल किसानों की आय को बढ़ाते हैं, बल्कि मिट्टी के स्वास्थ्य को भी बनाए रखने में मदद करते हैं।

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